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वेरोना के दो सज्जन सामान्यतः 1590 के दशक की शुरुआत में रचित माना जाता है और शेक्सपियर की सबसे पुरानी जीवित हास्य रचनाओं में से एक है। प्रारम्भिक आधुनिक अंग्रेज़ी में लिखा यह नाटक एलिज़बेथियन रंगमंच के उस संक्रमणकाल को दर्शाता है जिसमें पद्य और गद्य बारी-बारी से आते हैं और शहरी पृष्ठभूमियाँ देहाती अव्यवस्था से जुड़ जाती हैं। यह पहले क्वार्टो रूप में प्रचलित था और बाद में प्रथम फोलियो (1623) में सम्मिलित हुआ, जो शेक्सपियरियन कैनन के पाठ्य-विकास और संपादकीय परिश्रम का संकेत है। नाटकीय परिदृश्य—वेरोना व मिलान; मित्र प्रोथियस और वेलेंटाइन की तंजभरी बातें; तथा प्रेम, वफादारी और प्रतिष्ठा जैसे सामाजिक विषय—उस युग के शिष्टाचार, गतिशीलता और चतुराई के प्रति चिंताओं को प्रतिबिंबित करते हैं। भाषा की बनावट में शब्द-खेल, कहावतें और पद्य व गद्य के तीव्र संक्रमण मिलते हैं, जो शेक्सपियर के बाद की अधिक जटिल कथानक-रचनाओं और स्वर-वैविध्य की ओर उसके विकास का एक महत्वपूर्ण चरण दर्शाते हैं। विद्वान अक्सर इसे वफादारी, मित्रता और कामना के परिणामों पर चिंतन के रूप में पढ़ते हैं; वेश-भूषा, पत्र-लेखन की साजिशें और सामाजिक दरारों का तीव्र नियमन वे औपचारिक उपकरण हैं जिनका बाद में शेक्सपियर की 'कॉमेडी ऑफ़ मेनर्स' में व्यापक उपयोग हुआ। यद्यपि कभी-कभी इसे हल्का और आरम्भिक कृत्य माना जाता है, यह नाटक रोमांटिक भावनाओं और हास्यात्मक विडम्बना का एक व्यावहारिक मिश्रण स्थापित करता है जिसने बाद की महान कृतियों को प्रभावित किया और यूरोपीय रंगमंचीय हास्य की व्यापक परंपरा में योगदान देते हुए प्रेम, मित्रता और फ्लर्टिंग के परिणामों पर आगे की खोजों को आकार दिया।