"अंत भला तो सब भला" विलियम शेक्सपियर का उत्तर-एलिज़बेथन/प्रारम्भिक जेमोबियन कालीन कॉमेडी नाटक है, जिसे सत्रहवीं सदी के मुहाने पर अंग्रेज़ी पुनर्जागरण रंगमंच की पृष्ठभूमि में रचा गया था। शेक्सपियर, जो किंग्स मेन के अभिनेता-नाट्यकार थे, उस समय की व्यावसायिक और प्रदर्शन-संस्कृति में काम करते थे जहाँ त्वरित प्लॉट-आविष्कार, चतुर संवाद और छंद व गद्य का लचीलापन महत्वपूर्ण था। रचना लगभग 1604–1605 के आसपास रोमांस और 'प्रॉब्लम प्ले' के समूह में आती है; संभवतः एक क्वाट्रो संस्करण circa 1604 प्रकाशित हुआ और 1623 का प्रथम फोलियो बाद की सम्पादकीय रीस्पॉन्स को संरक्षित व प्रभावित करता है। नाटक की भाषा प्रारम्भिक आधुनिक अंग्रेज़ी की है—भव्य अलंकार, लिंग-विशिष्ट अभिव्यक्तियाँ और वाक्चातुर्य पर आश्रित विरोधाभास तथा सामाजिक व्यंग्य स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। फ्रांस और एक राजसी दरबार की पृष्ठभूमियाँ पद, सदाचार और दरबारी जीवन की आवश्यकताओं की परख सम्भव बनाती हैं, जबकि हेलेना का अभ्युत्थान—वार्ड से पत्नी बनने तक—पितृसत्तात्मक ढांचे में एजेंसी के प्रश्नों को केंद्र में लाता है। आलोचनात्मक दृष्टि से यह नाटक कॉमेडी और रोमांस का मिश्रित रूप माना गया है और 'प्रॉब्लम प्ले' कहा जाता है, क्योंकि इसका नैतिक रूप से अस्पष्ट समापन और हेलेना की भक्ति का बर्ट्रम के मनमाने अधिकार से असहज मेल सवाल पैदा करता है। उद्घाटन दृश्य, हेलेना के पुण्य पर भाषण, दरबारी फ्लर्ट और कुमारीत्व की नाटकीय राजनीति, शेक्सपियर की लिंग-विषयक व शक्ति-संबंधी रुचियों को उजागर करते हैं। नाटक की लोकभाषीय तेज़ी, पैरोडिक क्लाउन-पारॉल्स और प्रेम, सामाजिक दायित्व व व्यक्तिगत अखण्डता के बीच तनाव सामाजिक गतिशीलता की सीमाएँ, सहमति की वैधता और असंपूर्ण परिस्थितियों में न्यायसंगत समाप्ति के प्रश्न उठाते हैं; आधुनिक मंचन व रूपांतरण अक्सर हेलेना की रणनीतिक एजेंसी, शाही या अभिजात्य अधिकार की नाज़ुकता और शेक्सपियर की नाटकीय भाषा द्वारा सदाचार व सुख की पारंपरिक अपेक्षाओं के विचलन को उजागर करते हैं।