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जेन ऑस्टेन का गर्व और पूर्वाग्रह (1813) उन्नीसवीं शताब्दी की आरंभिक ब्रिटिश उपन्यास परंपरा और रीजेंसी काल के परिवेश में उभरा, जब संवेदनशीलता, आचार-व्यवहार और विवाह के सामाजिक अर्थ अंग्रेज़ी भाषी मुद्रण-संस्कृति में केंद्रीय बहस के विषय थे। एंग्लिकन पादरी की बेटी और जेंट्री जीवन की तीक्ष्ण विश्लेषक ऑस्टेन ने एक विशिष्ट कथात्मक कला को परिष्कृत किया, जिसने पहले के घरेलू उपन्यासों की सामग्री को ग्रहण कर उसे रूपांतरित किया। यह उपन्यास लंदन में तीन खंडों में अनाम रूप से पहली बार प्रकाशित हुआ और एक पूर्व पत्रात्मक मसौदे (“फर्स्ट इम्प्रेशंस”) से लिया गया पदार्थ पुनःसंकलित कर, प्रांतीय समाज के चित्रण को सघन नियंत्रित तृतीय-पुरुष कथन और विडंबनात्मक शैली के साथ संरेखित करता है, जिसे समकालीन पाठक नैतिक रूप से गंभीर तथा सामाजिक रूप से तिखा मानते थे।
उपन्यास की स्थायी शक्ति रोमांटिक कथानक को उस आर्थिक व वैचारिक ढाँचे की कठोर आलोचना के साथ मिलाने में है जो प्रेयस-परिचय और प्रतिष्ठा को नियंत्रित करता है। एलिज़ाबेथ बेनेट के व्याख्यात्मक संघर्षों और फ़िट्ज़विलियम डार्सी के साथ उसके बदलते संबंध के माध्यम से ऑस्टेन गर्व, पूर्वाग्रह, वर्ग-कल्पना और आत्म-परभ्रम के परस्पर क्रिया-प्रतिक्रिया का सूक्ष्म विश्लेषण करती हैं, और मुक्त अप्रत्यक्ष वाणी का प्रयोग कर चेतना को अभूतपूर्व सूक्ष्मता और हास्यपूर्ण सटीकता के साथ प्रस्तुत करती हैं। वसीयत-शर्त, विरासत और विवाह बाजार से संरचित इसका सामाजिक जगत एक ऐसा मंच बन जाता है जहाँ स्वायत्तता, नैतिक निर्णय और धारणा की नैतिकता जैसे प्रश्नों की कसौटी होती है, जिससे यह कृति बाद के यथार्थवादी उपन्यासों के लिए मौलिक बन गई। गर्व और पूर्वाग्रह ने कथन-तकनीक और विवाह-कथानक पर व्यापक प्रभाव डाला है और यह अंग्रेज़ी साहित्यिक कैनन में लिंग, वर्ग और विडंबना पर होने वाली चर्चाओं के लिए आज भी एक मानक बनी हुई है।