Length12h 18m
About this audiobook
'रजत संस्करण' का यह नवम और विशेष खंड है। इसे 'आनुषंगिक' कहा गया, क्योंकि इसमें 'महासमर' की कथा नहीं, उस कथा को समझने के सूत्र हैं। हम इसे 'महासमर' का नेपथ्य भी कह सकते हैं। 'महासमर' लिखते हुए, लेखक के मन में कौन-कौन सी समस्याएँ और कौन-कौन से प्रश्न थे? किसी घटना अथवा चरित्र को वर्तमान रूप में प्रस्तुत करने का क्या कारण था? वस्तुतः यह लेखक की सृजनप्रक्रिया के गवाक्ष खोलने जैसा है। 'महाभारत' की मूल कथा के साथ-साथ लेखक के कृतित्व को समझने के लिए यह जानकारी भी आवश्यक है। यह सामग्री पहले 'जहाँ है धर्म, वहीं है जय' के रूप में प्रकाशित हुई थी। अनेक विद्वानों ने इसे 'महासमर' की भूमिका के विषय में देखा है। अतः इसे 'महासमर' के एक अंग के रूप में ही प्रकाशित किया जा रहा है। प्रश्न 'महाभारत' की प्रासंगिकता का भी है। अतः उक्त विषय पर लिखा गया यह निबंध, जो ओस्लो (नार्वे) में मार्च 2008 की एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में पढ़ा गया था, इस खंड में इस आशा से सम्मिलित कर दिया गया है, कि पाठक इसके माध्यम से 'महासमर' को ही नहीं 'महाभारत' को भी सघन रूप से ग्रहण कर पाएँगे। अंत में 'महासमर' के पात्रों का संक्षिप्त परिचय है। यह केवल उन पाठकों के लिए है, जो मूल 'महाभारत' के पात्रों से परिचित नहीं हैं। इसकी सार्थकता अभारतीय पाठकों के लिए भी है।
Audiobook details
Rating★★★★★ 4.5 (162)
Includes Goodreads, Amazon
GenreLiterary Classics, Fantasy
Length12 hrs 18 mins
Narrated byKamal Sharma
FormatAudiobook
Publish dateMay 12, 2021
LanguageHindi
