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युगावतार श्री श्री रामकृष्ण की लीलाकथा को केंद्रित करते हुए उन्नीसवीं सदी के अंतिम पर्व से लेकर अनेक जीवनी, कथामृत, पुस्तक, काव्य, नाटक, यात्रा, चलचित्र इत्यादि की रचना की गई है।
इतिहास की मर्यादा को पूरी तरह अक्षुण्ण रखकर, मृत्युंजयी साहित्य सृजनकर्ताओं के मार्गदर्शन, कल्पना और सत्य घटनाओं पर आधारित इस उपन्यास की रचना की है इस युग के प्रिय लेखक शंकर ने, जिनकी पूर्व प्रकाशित कृतियों को पाठकों की भरपूर सराहना मिली।
इस रहस्य उपन्यास में कई काल्पनिक चरित्रों का समावेश किया गया है, कई चरित्र इतिहास से जुड़े हैं, विशेषकर वे भाग्यशाली पुरुष जो 16 अगस्त, 1886 में श्रीरामकृष्ण के समाधि पर्व में काशीपुर उद्यान वाटी में उपस्थित थे।