
Mature
Audio only
Length4h 57m
About this audiobook
जब बाबूराव बागुल की आत्मकथा सबसे पहले उनकी मातृभाषा मराठी में प्रकाशित हुई थी तो उसने मराठी साहित्य और समाज को झकझोर दिया था. भारतीय समाज में जाति पर आधारित दमन और अपमान की साहसभरी कथा कहने कहने वाले यह पुस्तक अब एक क्लासिक मानी जाती है और दलित साहित्य में मील का पत्थर. उत्कृष्ट हिंदी अनुवाद में. ©Samvad Prakashan
Audiobook details
GenreGeneral Fiction
Length4 hrs 57 mins
Narrated byTrilok
FormatAudiobook
Publish dateMar 29, 2018
LanguageHindi