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होमोसेक्शूऐलिटी: धर्म के धंधेबाज़ों को धक्का समलैंगिकता को धर्म के धंधेबाज़ों ने संस्कृति पर अतिक्रमण बताया था, सुप्रीम कोर्ट ने उसे नैतिक और क़ानूनी क़रार देकर नागरिक अधिकारों व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मज़बूती दी है. साथ ही धर्म की उस घुटनभरी संकीर्णता से आज़ादी दिलाई है जहाँ लोगों के निजी अधिकारों व व्यक्तिगत सम्बंधों पर पाबंदी लगाई जाती है.