Length2h 8m
About this audiobook
अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ
मैं चाहता था चिराग़ों को आफ़ताब करूँ
बुतों से मुझको इजाजत अगर कभी मिल जाए
तो शहर भर के ख़ुदाओं को बेनकाब करूँ
उस आदमी को बस एक धुन सवार रहती है
बहुत हसीं है ये दुनिया इसे ख़राब करूँ
ये जिन्दगी जो मुझे कर्जदार करती है
कहीं अकेले में मिल जाए तो हिसाब करूँ
Audiobook details
GenrePoetry
Length2 hrs 8 mins
Narrated byPunit Sharma
FormatAudiobook
Publish dateJan 1, 2023
LanguageHindi
